Pargwal border : 4 Saal Baad Ghar Se Gayab Ladka Pakda Gaya – PoK Mein Training Lekar Wapas Aaya Tha !
हाल ही में, 12 दिसंबर 2025 को जम्मू के अखनूर सेक्टर में एक बहुत बड़ी घटना घटी, जहाँ हमारे सुरक्षा बलों ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। इस ऑपरेशन को एक सफल BSF infiltration foiled प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
यह घटना Jammu Akhnoor sector के परगवाल इलाके में हुई, जो अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण हमेशा से ही सुरक्षा के लिहाज से बहुत संवेदनशील रहा है। इस घुसपैठ की कोशिश ने एक बार फिर से cross-border terrorism के खतरे को उजागर कर दिया है, लेकिन साथ ही इसने हमारे जवानों की मुस्तैदी को भी साबित किया है।
Ek Sard Raat Aur BSF Ki Mustaidi
जैसे ही इस हरकत की पुष्टि हुई, BSF के जवानों ने तुरंत अपनी पोजीशन संभाली और उस घुसपैठिए को ललकारा। आम तौर पर ऐसी स्थितियों में गोलीबारी शुरू हो जाती है, लेकिन इस BSF infiltration foiled ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि जवानों ने बेहद संयम और पेशेवर तरीके से काम किया। उन्होंने घुसपैठिए को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया और उसे जिंदा पकड़ लिया।
एक जिंदा आतंकी का पकड़ा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी कामयाबी होती है, क्योंकि उससे Pakistan terror training कैम्प्स, उनके हैंडलर्स और भविष्य की योजनाओं के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। पकड़े जाने के बाद जब उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक मॉडिफाइड AK-सीरीज राइफल, एक मैगजीन, 10 राउंड गोलियां और एक खाली ड्रम मैगजीन बरामद हुई। एक Jaish-e-Mohammad terrorist का इस तरह भारी हथियारों के साथ पकड़ा जाना यह बताता है कि दुश्मन शांत नहीं बैठा है।

Abdul Khalik: Ek Local Ladke Ki Kahani Jo Bhatak Gaya
उसके परिवार वालों ने शायद पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवाई होगी और उम्मीद लगाई होगी कि उनका बेटा वापस आ जाएगा। लेकिन हकीकत यह थी कि वह सरहद पार कर चुका था। खुफिया रिपोर्ट्स और Abdul Khalik arrested होने के बाद मिली जानकारी के मुताबिक, वह 2021 में ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) चला गया था। वहां उसने Jaish-e-Mohammad terrorist संगठन जॉइन किया और फिर शुरू हुआ उसके ब्रेनवॉश और ट्रेनिंग का सिलसिला।
Pakistan Terror Training Camps Ka Sach
जब हम कहते हैं कि अब्दुल खालिक Pakistan terror training लेकर आया था, तो इसका मतलब सिर्फ बंदूक चलाना सीखना नहीं है। PoK में मौजूद ट्रेनिंग कैम्प्स में युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से एक जिहादी मशीन में बदल दिया जाता है। रिसर्च बताती है कि इन कैम्प्स में सुबह से शाम तक सिर्फ नफरत का पाठ पढ़ाया जाता है। अब्दुल खालिक जैसे युवाओं को वहां के LoC launch pads पर रखा जाता है, जहाँ वे घुसपैठ के सही मौके का इंतजार करते हैं। उसे AK-47, ग्रेनेड और आधुनिक संचार उपकरणों का इस्तेमाल करना सिखाया गया होगा।
अब्दुल खालिक का Jammu Akhnoor sector के रास्ते वापस आना यह भी इशारा करता है कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों की सख्ती के कारण अब आतंकियों ने जम्मू संभाग को अपना नया रास्ता बना लिया है। J&K security alert के बावजूद वे लगातार कोशिशें कर रहे हैं, जो उनकी हताशा को दिखाता है।
Infiltration Ka Tareeka: Kohra Aur Nadi Ka Sahara
सर्दियों के मौसम में Pargwal border और अखनूर सेक्टर घुसपैठियों के लिए पसंदीदा रास्ता क्यों बन जाता है? इसका मुख्य कारण है यहाँ की भौगोलिक स्थिति और मौसम। अखनूर के पास चिनाब नदी बहती है, जो कई जगहों पर सीमा के साथ-साथ या उसके आर-पार जाती है। सर्दियों में यहाँ घना कोहरा छा जाता है, जिससे विजिबिलिटी यानी देखने की क्षमता लगभग शून्य हो जाती है। armed intruder इसी कोहरे और नदी के रास्तों (riverine gaps) का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। कोहरे की आड़ में वे थर्मल कैमरों से बचने की उम्मीद करते हैं, लेकिन BSF की तकनीक अब इतनी उन्नत हो चुकी है कि कोहरा भी उन्हें पूरी तरह नहीं छिपा सकता।
इसी वजह से यह BSF infiltration foiled ऑपरेशन सफल हो पाया। चिनाब नदी में BSF की वाटर विंग भी पेट्रोलिंग करती है, जो नावों के जरिए नदी के बीच के रास्तों पर नजर रखती है। अब्दुल खालिक के पास से जो ड्रम मैगजीन मिली है, वह भी इशारा करती है कि वह लंबी लड़ाई लड़ने या ज्यादा नुकसान पहुँचाने की तैयारी में था। cross-border terrorism में अब टेक्नोलॉजी और पुराने तरीकों का मिला-जुला इस्तेमाल हो रहा है, जिससे निपटने के लिए हमारे जवान हमेशा तैयार रहते हैं।
Jammu Akhnoor Sector: Dushman Ki Aankh Ki Kirkiri
यही वजह है कि अब्दुल खालिक को सीमा पार करते ही दबोच लिया गया, उसे किसी स्थानीय मदद तक पहुँचने का मौका ही नहीं मिला। यह इंटेलिजेंस और ग्राउंड फोर्स के बीच बेहतरीन तालमेल का नतीजा है। Jaish-e-Mohammad terrorist संगठन अब जम्मू रीजन में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि सुरक्षा बलों का ध्यान कश्मीर से हटाया जा सके, लेकिन हमारे जवान उनकी हर चाल को नाकाम कर रहे हैं।
2025 Ka Geopolitical Mahual Aur Operation Sindoor
लेकिन Abdul Khalik arrested होने से यह पता चलता है कि दुश्मन शांत नहीं बैठा है। उन्होंने अपने कैम्प्स को दोबारा बनाया है या रिलोकेट किया है और अब वे बदला लेने की फिराक में हैं। BSF infiltration foiled ऑपरेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भी भारत की सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी गई है। cross-border terrorism अब एक नए फेज में एंटर कर चुका है। अब यह सिर्फ गोलीबारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ड्रोन, साइबर वॉरफेयर और हाइब्रिड मिलिटेंट्स का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। Pakistan terror training में अब इन नई तकनीकों को शामिल किया जा रहा है।
BSF Ki “Winter Strategy” Aur Technology Ka Role
सर्दियों से निपटने के लिए BSF हर साल अपनी एक खास “Winter Strategy” बनाती है। इस स्ट्रेटेजी में मैनपावर और मशीन दोनों का कॉम्बिनेशन होता है। Jammu Akhnoor sector में फॉग लाइट्स, लेजर वॉल्स और अंडरग्राउंड सेंसर्स लगाए गए हैं। ये सेंसर्स जमीन के नीचे होने वाली किसी भी हलचल को पकड़ लेते हैं। अगर कोई armed intruder फेंसिंग को काटने की कोशिश करता है, तो कंट्रोल रूम में अलार्म बज जाता है।
Jaish-e-Mohammad Ka Naya Chehra
अब्दुल खालिक जैसे “मिसिंग यूथ” का वापस आना यह दिखाता है कि JeM लॉन्ग-टर्म गेम खेल रहा है। वे लड़कों को सालों तक गायब रखते हैं, उन्हें Pakistan terror training देते हैं, और फिर सही वक्त आने पर लॉन्च करते हैं। Abdul Khalik arrested होना इसलिए एक बड़ी कामयाबी है क्योंकि इससे JeM की उस इन्वेस्टमेंट पर चोट पहुँची है जो उन्होंने खालिक पर 4 साल तक की थी। cross-border terrorism का यह बदलता स्वरूप सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहा है, लेकिन हमारी एजेंसियां भी इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
Aage Ki Raah: Kya Hoga Ab?
अब्दुल खालिक की गिरफ्तारी के बाद अब पूछताछ का दौर शुरू होगा। एजेंसियां यह जानने की कोशिश करेंगी कि LoC launch pads पर अभी कितने और आतंकी मौजूद हैं। क्या और भी ग्रुप्स इनफिल्ट्रेट करने की तैयारी में हैं? Jammu Akhnoor sector में और कौन से रास्ते हैं जो दुश्मन इस्तेमाल कर सकता है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सुरक्षा रणनीति को शेप करेंगे।

Comparison: Pehle vs Ab (Infiltration Trends)
नीचे एक टेबल दी गई है जो दिखाती है कि पिछले कुछ सालों में इनफिल्ट्रेशन के तरीकों में क्या बदलाव आया है और कैसे हमारी फोर्सेज ने उन्हें काउंटर किया है।
| Feature | Pehle (2020-2023) | Ab (2025 – Post Op Sindoor) |
| Focus Area | Kashmir Valley (Kupwara/Uri) | Jammu Akhnoor Sector, Rajouri, Poonch |
| Infiltrators Profile | Foreign Terrorists (Pakistani) | Local “Missing Youth” (Recycled) & Hybrids like Abdul Khalik |
| Infiltration Tactics | Mountain Passes, Cutting Fence | Riverine Gaps, Tunnels, Foggy Weather exploitation |
| Weaponry | AK-47, Grenades | Modified AK-series, Drum Magazines, Steel Core Bullets |
| Launch Pads | Traditional Camps (Muzaffarabad) | Dispersed LoC launch pads in Sialkot/Bhimber |
| Counter-Measure | Manual Patrolling | Integrated Surveillance Grid, Thermal Imagers, BSF infiltration foiled ops |
Conclusion
अंत में दोस्तों, यह कहना गलत नहीं होगा कि 12 दिसंबर की रात को Pargwal border पर जो हुआ, वह एक बड़ी जीत है। एक armed intruder को जिंदा पकड़ना, वह भी तब जब वह AK-47 जैसे घातक हथियारों से लैस हो, BSF की क्षमता को दर्शाता है।
लेकिन जंग अभी खत्म नहीं हुई है। जब तक Pakistan terror training कैम्प्स बंद नहीं होते और LoC launch pads पर आतंकियों का जमावड़ा खत्म नहीं होता, तब तक Jammu Akhnoor sector और पूरे J&K में खतरा बना रहेगा।
Gehrai Mein: Abdul Khalik Ki Giraftari Ke Mayne
जब हम cross-border terrorism की बात करते हैं, तो हम अक्सर टेक्नोलॉजी और वेपन्स की बात करते हैं, लेकिन ह्यूमन एलिमेंट सबसे क्रिटिकल होता है। अब्दुल खालिक को वापस भेजने का डिसीजन यह दिखाता है कि JeM अब “Homegrown Terror” का दिखावा करना चाहता है, भले ही ट्रेनिंग Pakistan terror training कैम्प्स में हुई हो।
वे दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि यह लोकल इंसर्जेंसी है, जबकि सच्चाई यह है कि हर armed intruder के पीछे ISI का हाथ और रिसोर्सेज होते हैं। BSF infiltration foiled होने से उनके इस नैरेटिव को भी चोट पहुँची है। अगर खालिक मारा जाता, तो वे उसे “लोकल शहीद” बनाकर प्रोपेगेंडा फैलाते। लेकिन जिंदा पकड़े जाने पर, वह अब एक गवाह है। वह बता सकता है कि कैसे उसे बहकाया गया, कैसे उसे बॉर्डर पार कराया गया, और वहां कैम्प्स में उसके साथ क्या हुआ।















