Pilibhit Car Accident : पूरी घटना कैसे हुई?
यह हादसा 28 नवंबर 2025 की सुबह लगभग 11 बजे Tanakpur Highway के सुनगढ़ी क्षेत्र में हुआ। शुबहम तिवारी, जो अवध नगर कॉलोनी के रहने वाले बताए जाते हैं, अपनी Ertiga Car Accident वाली गाड़ी से कहीं जा रहे थे। रास्ते में अचानक सड़क पर बच्चे आ गए। उन्हें बचाने के प्रयास में गाड़ी का नियंत्रण बिगड़ गया और कार फिसलते हुए सीधे गौहानिया तालाब की ओर जा गिरी, जिसे स्थानीय लोग Gauhania Suicide Pond भी कहते हैं।
यह तालाब 25–30 फीट गहरा है और पिछले कई वर्षों से खतरनाक स्थान माना जाता रहा है। गाड़ी जैसे ही तालाब में गिरी, वह तुरंत पानी में डूबने लगी। आसपास मौजूद लोग पहले तो घबरा गए, क्योंकि सब कुछ कुछ ही सेकंड में हो रहा था। वीडियो में साफ दिख रहा है कि गाड़ी की खिड़कियाँ बंद थीं, पानी अंदर भरने लगा था और UP Pond Sinking Video में शुबहम लगातार बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पानी के तेज दबाव और घबराहट के कारण वे धीरे-धीरे बेहोश हो गए।
Shubham Tiwari Rescue: डूबती गाड़ी के अंदर क्या हो रहा था?
गाड़ी अंदर से पूरी तरह लॉक जैसी स्थिति में थी। पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि खिड़कियां और दरवाजे खोलना लगभग नामुमकिन हो गया था। शुबहम ने कई बार कोशिश की, लेकिन जैसे-जैसे पानी ऊपर भरता गया, उनकी सांसें रुकने लगीं और वे बेहोश हो गए। यह पल बेहद खतरनाक था, क्योंकि आम तौर पर ऐसी दुर्घटनाओं में कुछ ही मिनटों में स्थिति गंभीर हो जाती है।
इसी बीच असली मोड़ आया — जब पास में मौजूद नाविक फैसल, जिन्हें लोग अब Faizal Boatman Hero कह रहे हैं, ने बिना सोचे-समझे सीधे अपनी नाव तालाब में उतार दी। वीडियो में यह पल साफ दिखता है कि फैसल कितनी तेजी से डूबती कार तक पहुंचे। उन्होंने खिड़की तोड़ने की कोशिश की, और इसी दौरान उनकी नाव भी पलट गई। लेकिन उन्होंने कोशिश बंद नहीं की।
Faizal Boatman Hero और Dinesh Kushwaha Save: दो जिंदगियाँ बचाने वाले बहादुर इंसान
जहाँ फैसल नाव लेकर पहुंचे, वहीं हाईवे से गुजर रहे एक राहगीर दिनेश कुशवाहा ने जैसे ही घटना देखी, तुरंत पानी में छलांग लगा दी। दिनेश को समझ आ गया था कि अगर अभी किसी ने मदद नहीं की, तो युवक की जान नहीं बचेगी। वीडियो में उनके साहस को देखकर लोग उन्हें “Real Hero” कह रहे हैं।
कार पूरी तरह तालाब में डूब चुकी थी और दोनों मिलकर खिड़की तोड़ने और शुबहम को बाहर खींचने में जुटे रहे। यह प्रक्रिया पूरे 12–15 मिनट तक चली, जो कि पानी में किसी को जीवित बचाने के लिए बहुत लंबा समय माना जाता है। फिर भी दोनों ने हार नहीं मानी। अंततः उन्होंने शुबहम को बाहर निकाला और तुरंत CPR देना शुरू किया।
यह दृश्य देखकर भीड़ में खड़े लोग भी भावुक हो गए। किसी ने कहा — “आज इंसानियत जीती है।”
Tanakpur Highway Crash: प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच
जब यह हादसा हुआ, तो तुरंत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। सिटी कोतवाल सत्येंद्र कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट विजयवर्धन तोमर ने गवाहों से पूरा विवरण लिया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि शुबहम शायद नशे में थे, लेकिन पुलिस ने इसे कन्फर्म नहीं किया। उन्होंने कहा कि जांच चल रही है और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
हालाँकि एक बात साफ कही गई —
फैसल और दिनेश को सम्मानित किया जाएगा।
कई सोशल मीडिया यूजर्स लगातार यह मांग कर रहे हैं कि इन्हें राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया जाए। Bravery Award Demand लगातार ट्रेंड पर बना हुआ है।
UP Pond Sinking Video: सोशल मीडिया पर क्यों हुआ वायरल?
Viral Rescue Pilibhit वाला वीडियो इतने तेजी से वायरल हुआ कि कुछ घंटों के भीतर लाखों व्यूज आ गए। वीडियो में जो मानवता और बहादुरी दिखती है, वही लोगों को सबसे ज्यादा छू गई। खासकर वो पल जब फैसल अपनी पलटी हुई नाव से निकलकर शुबहम को पकड़ने की कोशिश करते हैं और दिनेश गहरे पानी में डूबकर उनकी मदद करते हैं।
एक यूजर ने लिखा —
“तीवारी ने बच्चों को बचाया, फैसल ने तीवारी को बचाया — यही है असली इंसानियत।”
कई लोग पीलीभीत पुलिस को टैग करके लिख रहे हैं:
“इन दोनों को तुरंत सम्मान दो। असली हीरो वही हैं जो बिना पहचान और बिना डरे किसी की जान बचा लें।”
सुरक्षा सवाल: आखिर तालाब के पास बैरिकेड क्यों नहीं थे?
इस हादसे के बाद लोगों ने प्रशासन से एक बड़ा सवाल पूछा — इतने गहरे तालाब के पास कोई बैरिकेड क्यों नहीं लगाए गए? स्थानीय लोगों का कहना है कि इस Gauhania Suicide Pond के पास पहले भी हादसे हुए हैं। यह जगह कई सालों से खतरनाक मानी जाती है, लेकिन फिर भी सुरक्षा इंतज़ाम कमजोर ही रहे।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बच्चों को सड़क पर खेलने देना भी खतरनाक है। अगर उस समय बच्चे सड़क पर न होते, शायद यह Pilibhit Car Accident ही न होता।
अस्पताल अपडेट: शुबहम तिवारी की वर्तमान हालत
रेस्क्यू के तुरंत बाद शुबहम को पीलीभीत मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। डॉक्टरों ने साफ कहा कि उन्हें सही समय पर CPR मिलना सबसे बड़ा कारण है कि उनकी जान बची। फिलहाल वे होश में हैं, लेकिन अभी भी निगरानी में रखा गया है।
नीचे इस घटना से जुड़ी प्रमुख जानकारी का एक संक्षिप्त सारणी:
| विवरण | अपडेट |
|---|---|
| हादसे की तारीख | 28 नवंबर 2025 |
| स्थान | टनकपुर हाईवे, पीलीभीत |
| पीड़ित | शुबहम तिवारी |
| तालाब | गौहानिया (सुसाइड पॉन्ड) |
| रेस्क्यू हीरोज | फैसल (नाविक), दिनेश कुशवाहा |
| वायरल स्थिति | लाखों व्यूज, देशभर में चर्चा |
| पुरस्कार की मांग | तेज़ी से बढ़ती |
| स्वास्थ्य स्थिति | स्थिर लेकिन निगरानी में |
यह घटना राष्ट्रीय चर्चा का विषय क्यों बन गई?
इस घटना में डर, साहस, इंसानियत और सोशल मीडिया हर चीज़ का मिश्रण है। एक ओर Ertiga Car Accident से पैदा हुई खतरनाक स्थिति थी, दूसरी ओर दो आम लोगों की असामान्य बहादुरी। यही वजह है कि यह मामला पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गया।
“अगर फैसल और दिनेश न होते, तो आज कहानी कुछ और होती।”
समापन: इंसानियत का असली रूप और सीख
Pilibhit Car Accident सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि उस दिन दो लोगों ने साबित कर दिया कि इंसानियत अब भी ज़िंदा है। शुबहम ने बच्चों को बचाने की कोशिश की, फैसल ने शुबहम को बचाया, और दिनेश ने दोनों को बचाने में योगदान दिया। इस घटना ने दिखाया कि हर संकट में कोई न कोई ऐसा होता है जो खुद से पहले दूसरों के बारे में सोचता है।
यह घटना हमें यह सीख भी देती है—
वाहन चलाते समय हमेशा सतर्क रहें,
सीटबेल्ट पहनें,
और कार में विंडो-ब्रेकिंग हैमर जरूर रखें।
क्योंकि हादसे कभी बताकर नहीं आते।














