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Sanchar Saathi App 2025: The Powerful and Trusted Move Transforming India’s Digital Security

By Raushan Kumar

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Sanchar Saathi App 2025: भारत की डिजिटल सुरक्षा को बदलने वाला पावरफुल सरकारी कदम
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Sanchar Saathi App: भारत की साइबर सुरक्षा में एक शक्तिशाली बदलाव

Sanchar Saathi App भारत के टेलीकॉम सेक्टर में वह नाम बन चुका है जिसकी चर्चा हर तरफ है। डिजिटल फ्रॉड और मोबाइल सुरक्षा से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी ने भारत सरकार को एक ऐसे समाधान की तलाश में डाल दिया था, जो सरल, भरोसेमंद और देश के हर नागरिक के लिए उपयोगी हो। इसी दिशा में विकसित किया गया Sanchar Saathi App अब न सिर्फ चर्चा में है बल्कि इसके इर्द-गिर्द कई तरह की बहसें भी तेज़ी से उभर रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में Sanchar Saathi App को लेकर आई खबरों ने इस चर्चा को और भी गहरा कर दिया है, क्योंकि यह ऐप अब भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है।

Sanchar Saathi App को लेकर जिस तरह से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बातचीत हो रही है, उससे यह स्पष्ट है कि यह ऐप केवल एक सरकारी टूल नहीं रह गया बल्कि एक नीति-स्तर का मामला बन चुका है। जनता के मन में इससे जुड़े कई सवाल हैं और यह लेख उन सभी पहलुओं को विस्तार से समझाता है ताकि Sanchar Saathi App से जुड़े हर महत्वपूर्ण बिंदु को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।

Sanchar Saathi App का परिचय

Sanchar Saathi App एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जिसे Department of Telecommunications (DoT) ने नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विकसित किया है। यह जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ था और शुरू से ही इसका मुख्य उद्देश्य मोबाइल फ्रॉड, फर्जी सिम कार्ड, चोरी के मोबाइल और अन्य साइबर अपराधों से आम लोगों की सुरक्षा करना रहा है। यह ऐप CEIR यानी Central Equipment Identity Register के साथ जुड़ा हुआ है, जो देश में चोरी के मोबाइलों पर लगाम लगाने के लिए स्थापित किया गया था।

Sanchar Saathi App की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य नागरिक को ऐसे टूल्स देता है जिनकी मदद से वह अपने मोबाइल, सिम और उससे जुड़े डेटा की सुरक्षा को बेहतर ढंग से संभाल सकता है। चाहे IMEI check की सुविधा हो या SIM-switching history, चाहे फ्रॉड कॉल की रिपोर्टिंग करनी हो या अपने Lost/Stolen फोन को ब्लॉक करना हो, Sanchar Saathi App इन सभी जरूरतों को पूरा करता है।

Sanchar Saathi App क्यों चर्चा में है? (Sanchar Saathi latest news)

Sanchar Saathi App चर्चा में इसलिए है क्योंकि हाल ही में सरकार ने एक बड़ा आदेश जारी किया है जिसके अनुसार अब भारत में बिकने वाले हर नए फोन में Sanchar Saathi App को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 नवंबर 2025 को जारी किया गया और तभी से इस निर्णय की वजह से देश में बहस शुरू हो गई।

Sanchar Saathi latest news का केंद्र यह है कि इस आदेश के पीछे सरकार की मंशा देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करना है। लेकिन जैसे ही Reuters और BBC ने रिपोर्ट किया कि यह ऐप non-disableable भी हो सकता है, विवाद और बढ़ गया। रिपोर्ट्स का दावा था कि ऐप को न तो हटाया जा सकेगा और न ही disable किया जा सकेगा, जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या यह नागरिकों की privacy को प्रभावित करेगा।

सरकार का नया आदेश: Sanchar Saathi mandate 2025

Sanchar Saathi mandate 2025 के तहत भारत सरकार ने सभी मोबाइल निर्माताओं को आदेश दिया है कि वे मार्च 2026 तक अपने सभी नए स्मार्टफोन्स में Sanchar Saathi App को प्री-इंस्टॉल करें। सरकार का कहना है कि इस कदम से देश में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में महत्वपूर्ण कमी आएगी और नागरिक अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।

सरकार का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में हर साल दस मिलियन से अधिक फ्रॉड कॉल और मैसेज रिपोर्ट किए जाते हैं। ऐसे में Sanchar Saathi App का डिफॉल्ट रूप से फोन में मौजूद होना नागरिकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।

प्री-इंस्टॉल आवश्यकता (Sanchar Saathi pre-install)

Sanchar Saathi pre-install की आवश्यकता इसलिए महसूस की गई क्योंकि भारत जैसे विशाल देश में हर नागरिक तक सुरक्षा संबंधी ऐप्स को पहुंचाना आसान नहीं होता। सरकार का मानना है कि यदि यह ऐप डिफॉल्ट रूप से फोन में मौजूद रहेगा तो अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग करेंगे और साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी ऐप को प्री-इंस्टॉल करना नागरिकों की पसंद पर हस्तक्षेप माना जा सकता है, जिसे लेकर जनता में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।

कंपनियों पर प्रभाव

Sanchar Saathi mandate 2025 का सीधा प्रभाव मोबाइल कंपनियों पर पड़ेगा। Android डिवाइसेस में इस ऐप को शामिल करना तकनीकी रूप से आसान है, लेकिन Apple ने इस आदेश पर चिंता जताई है। iOS प्लेटफॉर्म की सख्त सुरक्षा नीतियों के कारण Apple ने कहा है कि वह इस तरह के forced pre-install को लेकर सहमत नहीं है।

इसी वजह से यह आदेश केवल सुरक्षा मुद्दा नहीं रह गया बल्कि एक बड़ा उद्योग-स्तरीय विषय बन गया है, जिसका असर भारत के स्मार्टफोन बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

Sanchar Saathi App की प्रमुख विशेषताएँ

Sanchar Saathi App की लोकप्रियता का कारण इसकी उपयोगी और आधुनिक विशेषताएँ हैं। यह ऐप नागरिकों को ऐसे कई फीचर्स देता है जो रोजमर्रा के मोबाइल उपयोग को सुरक्षित बनाते हैं।

इस ऐप का सबसे सशक्त हिस्सा इसका CEIR से जुड़ा होना है, जिसकी मदद से चोरी के मोबाइलों का देशव्यापी डेटाबेस तैयार किया जाता है। IMEI check के माध्यम से कोई भी उपयोगकर्ता यह पता कर सकता है कि उसका फोन ब्लैकलिस्टेड है या चोरी की श्रेणी में आता है।

इसके अलावा यह ऐप SIM-switching history भी दिखाता है, जिससे उपयोगकर्ता यह देख सकता है कि पिछले दिनों में उसके मोबाइल से कौन-कौन से SIM उपयोग में रहे हैं। फ्रॉड कॉल या मैसेज की रिपोर्टिंग भी सीधे DoT के सर्वर पर जाती है जिससे कार्रवाई में तेजी आती है।

Lost/Stolen मोबाइल की रिपोर्टिंग करना पहले काफी मुश्किल काम था, लेकिन अब Sanchar Saathi App पर कुछ ही मिनटों में उपयोगकर्ता अपने फोन को ब्लॉक कर सकता है ताकि कोई भी उसका दुरुपयोग न कर सके।

Sanchar Saathi IMEI Check: नकली फोन से बचाव

एक और बहुत ही काम का फीचर जो इस ऐप में है, वो है Sanchar Saathi IMEI check। भारत में सेकंड हैंड या रिफर्बिश्ड फोन का बहुत बड़ा बाजार है। कई बार लोग अनजाने में चोरी का फोन या नकली IMEI वाला फोन खरीद लेते हैं, जो बाद में उनके लिए मुसीबत बन जाता है। इस ऐप की मदद से आप किसी भी फोन का IMEI नंबर डालकर यह चेक कर सकते हैं कि वह डिवाइस असली है या नहीं, या कहीं वह ब्लैकलिस्टेड तो नहीं है। DoT का मकसद है कि नॉन-जेनुइन हैंडसेट्स को नेटवर्क से बाहर किया जाए, क्योंकि ऐसे फोन्स को ट्रैक करना मुश्किल होता है और इनका इस्तेमाल अक्सर आपराधिक गतिविधियों में होता है।

जब आप नया फोन खरीदने जाएं या किसी से पुराना फोन लें, तो Sanchar Saathi App का यह फीचर आपके बहुत काम आएगा। यह आपको ठगी का शिकार होने से बचा सकता है। यह फीचर इतना महत्वपूर्ण है कि सरकार चाहती है हर व्यक्ति इसे आसानी से एक्सेस कर सके। इसीलिए इसे होम स्क्रीन पर लाने की बात हो रही है। जब यह टूल हर किसी की जेब में होगा, तो नकली और चोरी के फोन्स का धंधा अपने आप कम हो जाएगा। यह तकनीकी रूप से एक बहुत ही मजबूत कदम है जो भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क को साफ-सुथरा बनाने में मदद करेगा।

प्राइवेसी बनाम सुरक्षा: एक तुलना

इस बहस को और बेहतर समझने के लिए, चलिए एक नज़र डालते हैं कि सरकार क्या दावा कर रही है और आलोचक क्या कह रहे हैं। यह टेबल आपको स्थिति स्पष्ट करने में मदद करेगी:

विषयसरकार का पक्ष (DoT & Minister)आलोचकों और प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का पक्ष
ऐप का उद्देश्यSanchar Saathi cyber safety को बढ़ाना और फ्रॉड रोकना।यह एक सर्विलांस टूल बन सकता है (“Big Brother”)।
इंस्टॉलेशनसुरक्षा के लिए प्री-इंस्टॉल जरूरी है।बिना यूजर की मर्जी के ऐप थोपना गलत है।
अनइंस्टॉल विकल्पSanchar Saathi optional है, यूजर इसे हटा सकते हैं।रिपोर्ट्स में “non-disableable” होने का डर जताया गया था।
डाटा प्राइवेसीनागरिक केंद्रित पहल, डाटा सुरक्षित है।परमिशन (नेटवर्क, वाइब्रेशन) से जासूसी का खतरा है।
ग्लोबल उदाहरणसाइबर थ्रेट्स से लड़ने के लिए जरूरी कदम।रूस के MAX Messenger जैसा तानाशाही कदम।

यह तुलना साफ दिखाती है कि दोनों पक्षों के पास अपने-अपने तर्क हैं। जहाँ सरकार सुरक्षा के आंकड़े दिखा रही है, वहीं एक्सपर्ट्स Sanchar Saathi privacy concerns को लेकर भविष्य की चेतावनी दे रहे हैं।

 

Sanchar Saathi App Controversy क्यों बढ़ी?

Sanchar Saathi controversy तब शुरू हुई जब Reuters और BBC ने रिपोर्ट किया कि सरकार ऐप को non-disableable बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका अर्थ था कि उपयोगकर्ता ऐप को न तो हटा पाएंगे और न ही disable कर पाएंगे।

इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे Big Brother स्टाइल surveillance बताया। विपक्ष और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स का कहना था कि कोई भी सरकारी ऐप यदि अनिवार्य और अनहटाने योग्य बनाया जाए तो इसका सीधा असर नागरिकों की निजता पर पड़ सकता है।

Apple vs Android: कंपनियों का रिएक्शन

इस पूरे मामले में मोबाइल कंपनियों की भूमिका भी बहुत अहम है। भारत में 95% मार्केट शेयर Android का है, जबकि iOS (Apple) के पास सिर्फ 4.5% हिस्सेदारी है। Sanchar Saathi pre-install का आदेश Android फोन्स पर लागू करना तकनीकी रूप से थोड़ा आसान हो सकता है, लेकिन Apple जैसी कंपनी के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।

Apple हमेशा से अपनी प्राइवेसी और इकोसिस्टम को लेकर बहुत सख्त रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने प्राइवेसी कंसर्न्स का हवाला देते हुए इस नियम का पालन न करने का इरादा जताया है या कम से कम अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।

दूसरी तरफ, Samsung और Xiaomi जैसी बड़ी Android कंपनियों ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अंदरखाने चर्चा गर्म है। इंडस्ट्री सोर्सेज का कहना है कि किसी थर्ड-पार्टी ऐप को सिस्टम लेवल पर इंटीग्रेट करना और उसे होम स्क्रीन पर जगह देना आसान नहीं है। इसके लिए उन्हें अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में बदलाव करने होंगे और टेस्टिंग करनी होगी, जिसमें समय और पैसा दोनों लगता है।

सप्लाई चेन में मौजूद लाखों फोन्स को अपडेट करना भी एक लॉजिस्टिकल दुःस्वप्न हो सकता है। मिड-2025 तक भारत में करीब 735 मिलियन स्मार्टफोन्स हैं, और इतने बड़े यूजर बेस तक पहुंचना कोई बच्चों का खेल नहीं है।

विपक्ष और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स के आरोप

विपक्ष और प्राइवेसी विशेषज्ञों ने कहा कि यह ऐप गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है। उनका मानना था कि ऐप के पास नेटवर्क एक्सेस की अनुमति होती है जिससे यह नागरिकों की गतिविधियों पर निगरानी रख सकता है। हालांकि, ऐप वास्तव में क्या डेटा इकट्ठा करता है, इस पर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता बताई गई।

क्या Sanchar Saathi Optional है? मंत्री जी की सफाई

जब विवाद बढ़ा, तो सरकार को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। टेलीकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि Sanchar Saathi App पूरी तरह से यूजर की मर्जी पर निर्भर करेगा। उन्होंने उन रिपोर्ट्स का खंडन किया जिनमें इसे जबरदस्ती थोपने की बात कही जा रही थी। मंत्री जी के अनुसार, Sanchar Saathi optional है और यह कोई जासूसी का टूल नहीं है। उनका कहना है कि यूजर्स अगर चाहें तो इसे अपने फोन से डिलीट कर सकते हैं। यह बयान उन लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंतित थे।

सरकार का कहना है कि यह ऐप जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को साइबर फ्रॉड से बचाना है। मिनिस्टर सिंधिया ने इसे “citizen-centric initiative” बताया। यानी यह ऐप सरकार के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की भलाई के लिए है। DoT का तर्क है कि जब तक यह ऐप हर फोन में नहीं होगा, तब तक हम साइबर अपराधियों के नेटवर्क को नहीं तोड़ पाएंगे। पिछले साल 10 मिलियन से ज्यादा फ्रॉड रिपोर्ट्स आई थीं, जो यह दिखाता है कि समस्या कितनी गंभीर है। इसलिए, सरकार चाहती है कि यह ऐप डिफॉल्ट रूप से फोन में हो, लेकिन इसका इस्तेमाल करना या न करना अंततः यूजर के हाथ में ही रहेगा।

Sanchar Saathi privacy concerns: उपयोगकर्ताओं की चिंताएँ

Sanchar Saathi privacy concerns का मुख्य बिंदु अनुमति (permissions) से जुड़ा है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐप को नेटवर्क एक्सेस, वाइब्रेशन कंट्रोल और अन्य तकनीकी permissions की आवश्यकता होती है, जो गोपनीयता के मुद्दे को जन्म देती है।

उपयोगकर्ताओं का यह भी कहना है कि किसी ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अपने आप में एक तरह का behavioral influence होता है, क्योंकि बहुत से यूजर्स डिफॉल्ट ऐप्स को वैसा ही उपयोग करते हैं बिना uninstall किए।

सरकार का कहना है कि यह ऐप केवल तकनीकी सुरक्षा से संबंधित डेटा को प्रोसेस करता है और इसे किसी भी प्रकार की निगरानी के लिए उपयोग नहीं किया जाता।

Sanchar Saathi cyber safety: कितना सुरक्षित है?

Sanchar Saathi App साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। CEIR के एकीकरण के कारण यह ऐप मोबाइल चोरी और फ्रॉड की घटनाओं को काफी हद तक कम कर सकता है।

सरकार का कहना है कि भारत में हर साल लाखों साइबर धोखाधड़ी की घटनाएँ होती हैं और यह ऐप उन घटनाओं पर लगाम लगाने में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

फ्रॉड कॉल्स, impersonation fraud और IMEI cloning जैसे मामलों में यह ऐप एक विश्वसनीय समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

भारत vs रूस: एक वैश्विक तुलना

कई विशेषज्ञ भारत के Sanchar Saathi App की तुलना रूस के MAX Messenger से कर रहे हैं जो 2025 में अनिवार्य किया गया था। अंतर यह है कि रूस में ऐप को हटाया नहीं जा सकता जबकि भारत सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि Sanchar Saathi App optional रहेगा।

हालांकि दोनों देशों में प्राइवेसी से जुड़ी बहसें जोर पकड़ चुकी हैं और इसका भविष्य तकनीकी नीतियों पर निर्भर करेगा।

Sanchar Saathi App का भविष्य: 2026 तक का रोडमैप

Sanchar Saathi App का भविष्य काफी व्यापक है। सरकार 2026 तक इसे एक पूर्ण साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसमें CEIR डेटाबेस को और अधिक मजबूत करना, ऐप को पुराने फोनों में software update के माध्यम से भेजना और फ्रॉड रोकथाम के लिए नई सुविधाएँ जोड़ना शामिल है।

सरकार का यह भी कहना है कि यदि यह ऐप व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है तो भारत में मोबाइल चोरी और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की जा सकती है।

FAQs

Sanchar Saathi App के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले कई प्रश्न हैं जिनका उत्तर जानना जरूरी है। पहला प्रश्न यह उठता है कि क्या यह ऐप अनिवार्य है। इस बारे में मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह ऐच्छिक है और कोई भी उपयोगकर्ता इसे delete कर सकता है। दूसरा प्रश्न यह है कि क्या ऐप डेटा एकत्र करता है, और इसका उत्तर है कि ऐप केवल तकनीकी सुरक्षा से जुड़े डेटा को प्रोसेस करता है और निजी जानकारी जुटाने का कोई कार्य नहीं करता। तीसरा प्रश्न iPhone उपयोगकर्ताओं से जुड़ा है कि क्या उन्हें यह ऐप मिलेगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि iOS पर भी यह ऐप उपलब्ध होगा, लेकिन Apple ने प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएँ जताई हैं। चौथा प्रश्न IMEI check से संबंधित है जिसमें उपयोगकर्ता यह पता लगा सकता है कि उसका फोन ब्लैकलिस्टेड है या नहीं। पाँचवाँ प्रश्न है कि क्या यह ऐप साइबर फ्रॉड रोक सकता है। सरकार का कहना है कि यह फ्रॉड रिपोर्टिंग को सरल बनाता है, जिससे कार्रवाई में तेजी आती है। छठा प्रश्न यह है कि क्या ऐप सुरक्षित है, और सरकार ने आश्वासन दिया है कि ऐप में उपयोगकर्ता की गोपनीयता की रक्षा के लिए सभी तकनीकी उपाय शामिल किए गए हैं।

निष्कर्ष: क्या आपको चिंता करनी चाहिए?

अंत में, सवाल यही आता है कि एक आम नागरिक के तौर पर आपको क्या करना चाहिए? फिलहाल, Sanchar Saathi App को लेकर स्थिति काफी हद तक साफ़ हो चुकी है। मंत्री जी के बयान के बाद यह स्पष्ट है कि यह ऐप आपके फोन में आएगा तो जरूर, लेकिन उसे रखना या हटाना आपकी मर्जी होगी। आपको Sanchar Saathi IMEI check और फ्रॉड रिपोर्टिंग जैसे फीचर्स का फायदा जरूर उठाना चाहिए, क्योंकि आज के डिजिटल दौर में सावधानी ही बचाव है। लेकिन साथ ही, अपनी प्राइवेसी को लेकर भी सतर्क रहें।

आने वाले दिनों में DoT Sanchar Saathi मुहिम कैसे आगे बढ़ती है और Apple जैसी कंपनियां इस पर क्या फाइनल स्टैंड लेती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। यह अपडेट टेलीकॉम सिक्योरिटी को एक नया मोड़ दे रहा है, लेकिन प्राइवेसी वर्सेस सेफ्टी की बहस अभी खत्म नहीं हुई है। आप इस ऐप को एक टूल की तरह इस्तेमाल करें, न कि किसी डर की तरह। अगर आपको लगता है कि यह आपके काम का है, तो इसे रखें, वरना डिलीट करने का ऑप्शन (सरकार के मुताबिक) तो आपके पास है ही।

तो दोस्तों, यह थी Sanchar Saathi App की पूरी कहानी। उम्मीद है कि इस आर्टिकल ने आपके सारे सवालों के जवाब दे दिए होंगे। टेक्नोलॉजी बदल रही है और उसके साथ नियम भी, जरूरी है कि हम भी अपडेट रहें और सुरक्षित रहें।

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Raushan Kumar

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